
1. यूरोप में राष्ट्रवाद
राष्ट्रवाद- अपने राष्ट्र के प्रति प्रेम की भावना को राष्ट्रवाद कहते हैं।
बीजारोपण- पुनर्जागरण के काल (14वीं और 17वीं शताब्दी के बीच)
- 1789 ई॰ की फ्रांसीसी क्रांति से उन्नत रूप में प्रकट।
वियना कांगेस क्या है?
यूरोपीय देशों के राजदूतों का सम्मेलन (1815) को आस्ट्रिया की राजधानी वियना।
नेपोलियन कौन था?
नेपोलियन एक महान सम्राट, अपने व्यक्तित्व एवं कार्यों से पूरे यूरोप को प्रभावित, 24 वर्ष की आयु में सेनापति, फिर फ्रांस का शासक बना।
नेपोलियन का शासनकाल
नेपोलियन ने फ्रांस में प्रजातंत्र को हटाकर राजतंत्र स्थापित किया।
नगरिक संहिता या नेपोलियन की संहिता 1804
- कानून के समक्ष सबको बराबर रखा गया।
- संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित रखा गया।
- भू-दासत्व और जागीरदारी शुल्क से मुक्ति दिलाई।
- कुलीन वर्ग उच्च वर्ग के थे, जो शासन के साथ सेना के उच्च पदों पर थे।
- निम्न वर्ग में कृषक वर्ग आते थे, जो शोषित थे।
- बीच में एक और वर्ग जुड़ गया। जिसे मध्यम वर्ग कहा गया।
वियना सम्मेलन- वियना, 1815 में, मुख्य उद्देश्य पुरातन व्यवस्था को स्थापित करना, आस्ट्रिया के चांसलर मेटरनिख द्वारा मेजबानी।
- इस सम्मेलन के द्वारा इटली, जर्मनी तथा फ्रांस में पुरात्तन व्यवस्था स्थापित।
- फ्रांस में बूर्वों राजवंश को पुनर्स्थापित तथा लुई 18 वाँ फ्रांस का राजा बना।
मेटरनिख युग- 1815-48 तक के काल
जुलाई 1830 की क्रांतिः
- मुख्य कारण- लुई 18 वाँ द्वारा किए गए सुधारों के साथ छेड़-छाड़ करना तथा चार्ल्स-X का निरंकुश होना।
- पोलिग्नेक को प्रधानमंत्री बनाना। समान नागरिक संहिता को समाप्त कर अभिजात्य अर्थात उच्च वर्ग को विशेष आधिकारों से विभूषित करना।
- चार्ल्स-X ने विरोध को दबाने के लिए 25 जुलाई 1830 ई॰ को चार अध्यादेशों (कानून) के द्वारा उदार तत्वों का गला घोंटने का प्रयास।
- जिसके विरोध में पेरिस में क्रांति की लहर दौड़ गई और फ्रांस में 28 जून 1830 ई॰ को गृहयुद्ध आरम्भ हो गया। जिसे जुलाई 1830 की क्रांति कहते हैं।
परिणाम
- चार्ल्स-X राजगद्दी छोड़कर इंग्लैंड पलायन ।
- फ्रांस में बूर्वो वंश के शासन का अंत ।
- बूर्वो वंश के स्थान पर आर्लेयेंश वंश के शासक लुई फिलिप को शासक बनाना।
1830 की क्रांति का प्रभाव
- वियना क्रांग्रेस के प्रभाव को समाप्त किया।
- अन्य देशों जैसे यूनान, पोलैंड तथा हंगरी के साथ पूरे यूरोप में राष्ट्रीयता तथा एकीकरण के लिए आंदोलन शुरू।
1848 की क्रांति
- आर्लेयेंस वंश के शासक लुई फिलिप के खिलाफ।
- मुख्य कारण ‘स्वर्णिम मध्यम वर्गीय नीति’ को समाप्त करना तथा गीजो को प्रधानमंत्री बनाना।
- लुई फिलिप ने पुँजीपतियों को साथ रखना पसंद किया, गीजो को प्रधानमंत्री नियुक्त किया, जो कट्टर प्रतिक्रियावादी था।
- देश में भुखमरी एवं बेरोजगारी व्याप्त होने लगी, जिससे गीजो की आलोचना होने लगी।
- विरोध के कारण लुई फिलिप ने गद्दी त्याग किया और इंगलैंड चला गया।
- उसके बाद नेशनल एसेम्बली ने गणतंत्र की घोषणा करते हुए 21 वर्ष से ऊपर के सभी व्यस्कों को मताधिकार प्रदान किया और काम के अधिकार की गारंटी दी।
1848 की क्रांति का प्रभाव
- पुरातन व्यवस्था का अंत किया।
- साथ ही इटली, जर्मनी, ऑस्ट्रिया, हालैंड, स्वीट्जरलैंड, डेनमार्क, स्पेन, पोलैंड, आयरलैंड तथा इंगलैंड को प्रभावित किया।
इटली का एकीकरण
- एकीकरण का अर्थ- एकजुट होना।
- एकीकरण में बहुत सारी धार्मिक, राजनीतिक और भौगोलिक समस्याएँ।
- आर्थिक और प्रशासनिक समस्याएँ
- विदेशी राष्ट्र ऑस्ट्रीया का हस्तक्षेप
- नेपोलियन की भी मुख्य भूमिका तथा राष्ट्रवाद को बढ़ावा।
- एक गुप्त दल ‘कार्बोनरी’ का गठन, उद्देश्य- छापामार युद्ध कर राजतंत्र को समाप्त करना।
- मेजिनी उत्तरी तथा मध्य इटली को एकीकृत कर एक गणराज्य बनाना चाहता था, लेकिन मेटरनिख ने इन आंदोलनों को दबा दिया।
- फलस्वरूप मेजिनी को इटली से पलायन करना पड़ा।
- मेजिनी ‘कोर्बोनरी’ दल का सदस्य था।
इटली के एकीकरण में मेजिनी का योगदान
- मेजिनी साहित्यकार, गणतांत्रिक विचारों के समर्थक और योग्य सेनापति।
- आदर्शवादी गुण अधिक और व्यावहारिक गुण कम।
- 1831 में ‘यंग इटली’ की स्थापना, जिसने नवीन इटली के निमार्ण में महत्वपूर्ण भाग लिया।
- उद्देश्य- इटली प्रायद्वीप से विदेशी हस्तक्षेप समाप्त करना तथा संयुक्त गणराज्य स्थापित करना।
- 1834 में ‘यंग यूरोप’ नामक संस्था का गठन कर मेजिनी ने यूरोप में चल रहे राष्ट्रीय आंदोलन को भी प्रोत्साहित किया।
- ऑस्ट्रीया के हस्तक्षेप से मेजिनी का पलायन।
इटली के एकीकरण का द्वितीय चरण
विक्टर इमैनुएल, काउंट कावूर तथा गैरीबाल्डी का अहम योगदान।
विक्टर इमैनुएल :
इटली में सार्डिनिया-पिडमाउण्ट का नया शासक ‘विक्टर इमैनुएल’ राष्ट्रवादी विचारधारा का था और एकीकरण के उद्देश्य से ‘काउंट कावूर’ को प्रधानमंत्री नियुक्त किया।
काउंट कावूर :
- कावूर एक सफल कुटनीतिज्ञ एवं राष्ट्रवादी। एकीकरण में सबसे बड़ी बाधा ऑस्ट्रीया को मानता था।
- ऑस्ट्रीया को पराजित करने के लिए फ्रांस के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाकर क्रिमीया के युद्ध 1853-54 में फ्रांस की ओर से शामिल होकर हो गया।
- 1859-60 में ऑस्ट्रीया तथा पिडमाउण्ट में सीमा संबंधी विवाद के कारण युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध में फ्रांस ने इटली के समर्थन में अपनी सेना उतार दी।
- इस प्रकार 1862 ई० तक दक्षिण इटली रोम तथा वेनेशिया को छोड़कर बाकी रियासतों का विलय रोम में हो गया और सभी ने विक्टर इमैनुएल को शासक माना।
गैरीबाल्डी :
- गैरीबाल्डी पेशे से एक नाविक था।
- उसने अपने सैनिकों को लेकर इटली के प्रांत सिसली तथा नेपल्स पर आक्रमण किये।
- गैरीबाल्डी ने यहाँ गणतंत्र की स्थापना की तथा विक्टर इमैनुएल के प्रतिनिधि के रूप में वहाँ को सत्ता सम्भाली।
- गैरीबाल्डी को भेंट कावूर से हुई। प्रभावित होकर दक्षिणी इटली के जीते गए क्षेत्र को बिना किसी संधि के विक्टर इमैनुएल को सौंप दिया।
1862 में गैरीबाल्डी के मत्यु के बाद रोम तथा वेनेशिया के रूप में शेष इटली का एकीकरण विक्टर इमैनुएल ने स्वयं किया।
1870-71 में फ्रांस और प्रशा के बीच युद्ध, जिस कारण फ्रांस के लिए पोप को संरक्षण प्रदान करना संभव नहीं था।
विक्टर इमैनुएल ने इस परिस्थिति का लाभ उठाकर पोप के राजमहल को छोड़कर बाकी रोम को इटली में मिला लिया और उसे अपनी राजधानी बनायी।
इस प्रकार 1871 ई० तक इटली का एकीकरण मेजिनी, कावूर, गैरीबाल्डी जैसे राष्ट्रवादी नेताओं एवं विक्टर इमैनुएल जैसे शासक के योगदानों के कारण पूर्ण हुआ।
जर्मनी का एकीकरण
इटली और जर्मनी का एकीकरण साथ-साथ सम्पन्न हुआ।
- आधुनिक युग में जर्मनी पुरी तरह से विखंडित राज्य (300 छोटे-बड़े राज्य)
- जर्मनी में राजनीतिक, सामाजिक तथा धार्मिक विषमताएँ।
- नेपोलियन बोनापार्ट द्वारा 1806 ई० में जर्मन प्रदेशों को जीत कर राईन राज्य संघ का निर्माण।
- उत्तरी जर्मनी में सबसे शक्तिशाली राज्य प्रशा। दक्षिणी जर्मनी के लोगों के अंदर राष्ट्रवाद की कमी थी।
- बुद्धिजीवियों, किसानों तथा कलाकारों, जैसे-हीगेल काण्ट, हम्बोल्ट, अन्डर्ट, जैकब ग्रीम आदि तथा शिक्षण संस्थानों एवं विद्यार्थियों का भी योगदान।
- शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने जर्मनी एकीकरण के उद्देश्य से ‘ब्रूशेन शैफ्ट’ नामक सभा स्थापित की।
- वाइमर राज्य का येना विश्वविद्यालय राष्ट्रीय आन्दोलन का केन्द्र था।
- 1834 में जन व्यापारियों ने आर्थिक व्यापारिक समानता के लिए प्रशा के नेतृत्व में ‘जालवेरिन‘ नामक आर्थिक संघ बनाया, जो जर्मन राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
- मार्च 1848 में पुराने संसद की सभा को फ्रैंकफर्ट (निर्णय)- प्रशा का शासक फ्रेडरिक विलियम जर्मन राष्ट्र का नेतृत्व करेगा।
- फ्रेडरिक विलियम का देहान्त हो जाने के बाद उसका भाई विलियम प्रशा का शासक बना।
विलियम ने एकीकरण के उद्देश्यों को ध्यान में रखकर महान कूटनितिज्ञ बिस्मार्क को अपना चांसलर नियुक्त किया।
जर्मनी का एकीकरण में बिस्मार्क
- बिस्मार्क एक सफल कुटनीतिज्ञ था, वह हीगेल के विचारों से प्रभावित था।
- वह जर्मन एकीकरण के लिए सैन्य शक्ति के महत्व को समझता था।
- ‘रक्त और लौह की नीति’ का अवलम्बन किया।
- ऑस्ट्रिया ने 1866 ई. में जर्मनी के खिलाफ सेडोवा की युद्ध की घोषण। युद्ध में ऑस्ट्रिया बुरी तरह पराजित।
- शेष जर्मनी के एकीकरण के लिए फ्रांस के साथ युद्ध करना आवश्यक था।
- स्पेन की उतराधिकार को लेकर 19 जून 1870 को फ्रांस के शासक नेपोलियन ने प्रशा के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी और सेडॉन की लड़ाई में फ्रांसीसियों की जबदस्त हार हुई।
- तदुपरांत 10 मई 1871 को फ्रैंकफर्ट की संधि द्वारा दोनों राष्ट्रों के बीच शांति स्थापित हुई।
- इस प्रकार सेडॉन के युद्ध में ही एक महाशक्ति के पतन पर दूसरी महाशक्ति जर्मनी का उदय हुआ।
- अंततः 1871 ई. तक जर्मनी का एकीकरण सम्पन्न हुआ।
जर्मन राष्ट्रवाद का प्रभाव
- यूरोप के साथ-साथ हंगरी, बोहेमिया तथा यूनान में स्वतंत्रता आन्दोलन शुरू।
- ओटोमन साम्राज्य के पतन। स्लाव जाति के लिए सर्बिया को जन्म।
यूनान में राष्ट्रीयता का उदय
- यूनान तुर्की साम्राज्य के अधीन था।
- फ्रांसीसी क्रांति से यूनानियों में राष्ट्रीयता की भावना की लहर जागी।
- हितेरिया फिलाइक नामक संस्था की स्थापना ओडेसा नामक स्थान पर की। इसका उद्देश्य तुर्की शासन को युनान से निष्काषित कर उसे स्वतंत्र बनाना था।
- इंग्लैंड का महान कवि वायरन यूनानियों की स्वतंत्रता के लिए यूनान में ही शहीद हो गया।
- 1821 ई० में अलेक्जेंडर चिपसिलांटी के नेतृत्व में यूनान में विद्रोह शुरू हो गया।
- 1827 में लंदन में एक सम्मेलन हुआ जिसमें इंग्लैंड, फ्रांस तथा रूस ने मिलकर तुर्की के खिलाफ तथा यूनान के समर्थन में संयुक्त कार्यवाही करने का निर्णय लिया।
- इस प्रकार तीनों देशों की संयुक्त सेना नावारिनो की खाड़ी में तुर्की के खिलाफ एकत्र हुई। तुर्की के समर्थन में सिर्फ मिस्र की सेना ही आयी।
- युद्ध में मिश्र और तुर्की की सेना बुरी तरह पराजित हुई
- 1829 ई० में एड्रियानोपल की संधि हुई, जिसके तहत तुर्की की नाममात्र की प्रभुता में यूनान को स्वायत्ता देने की बात तय हुई।
- यूनानी राष्ट्रवादियों ने संधि की बातों को मानने से इंकार कर दिया।
- 1832 में यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर बवेरिया के शासक ‘ओटो’ को स्वतंत्र यूनान का राजा घोषित किया गया।
हंगरी में राष्ट्रीयता का उदय
- हंगरी पर ऑस्ट्रिया का पूर्णतः प्रभाव।
- हंगरी में आंदोलन का नेतृत्व ‘कोसुथ’ तथा ‘फ्रांसिस डिक’ नामक क्रांतिकारी के द्वारा किया जा रहा था।
- 31 मार्च 1848 ई० को आस्ट्रिया की सरकार ने हंगरी की कई बातें मान ली, जिसके अनुसार स्वतंत्र मंत्रिपरिषद् की मांग स्वीकार की गई।
- इस प्रकार इन आन्दोलनों ने हंगरी को राष्ट्रीय अस्मिता प्रदान की।
पोलैंड
- पोलैंड में भी राष्ट्रवादी भावना के कारण, रूसी शासन के विरुद्ध विद्रोह शुरू हो गए।
- 1830 ई. की क्रांति का प्रभाव यहाँ के उदारवादियों पर भी व्यापक रूप से पड़ा था परन्तु इन्हें इंग्लैंड तथा फ्रांस की सहायता नहीं मिल सकी।
- रूस ने पोलैंड के विद्रोह को कुचल दिया।
बोहेमिया
- ऑस्ट्रियाई शासन के अंतर्गत, आन्दोलन ने हिंसात्मक रूप धारण कर लिया।
- ऑस्ट्रिया द्वारा क्रांतिकारियों का सख्ती से दमन कर दिया गया।
- इस प्रकार बोहेमिया में होने वाले क्रांतिकारी आन्दोलन का अंत।
परिणाम
- प्रत्येक राष्ट्र की जनता और शासक के लिए उनका राष्ट्र ही सब कुछ। इसके लिए वे किसी हद तक जाने के लिए तैयार रहने लगे।
- बड़े यूरोपीय राज्यों यथा, जर्मनी, इटली, फ्रांस, इंग्लैंड जैसे देशों में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ गई।
- भारत में भी यूरोपीय राष्ट्रवाद के संदेश पहुँचा।
- मैसूर का शासक टीपू सुल्तान स्वयं 1789 की फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित होकर जैकोबिन क्लब की स्थापना करवाई तथा स्वयं उसका सदस्य बना।
- श्रीरंगपट्टम में ही स्वतंत्रता का प्रतीक ‘वृक्ष‘ भी लगवाया।
- भारत में 1857 की क्रांति से ही राष्ट्रीयता के तत्व नजर आए।
- इस प्रकार यूरोप में जन्मी राष्ट्रीयता की भावना ने पहले यूरोप को एवं अंततः पूरे विश्व को प्रभावित किया।